गोरखनाथ संप्रदाय की सामाजिक समरसता के भाव पर लालू और नलिन वर्मा ने चलायी लेखनी
नलिन वर्मा और लालू प्रसाद की लिखी पुस्तक ‘लोर्स ऑफ लव एंड संत गोरखनाथ’ प्रकाशित राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और वरिष्ठ पत्रकार नलिन वर्मा की लिखी पुस्तक ” लोर्स ऑफ लव एंड संत गोरखनाथ ” साहित्य के वैश्विक फलक पर आयी है। अंग्र्रेजी में लिखी यह किताब प्रतिष्ठित प्रकाशन पेंगुइन बुक्स ने प्रकाशित की है। यह पुस्तक मुख्य रूप से गोरखनाथ संप्रदाय की शुरुआती दौर के परिदृश्य को खासतौर पर दर्शाया गया है। यह पुस्तक के जरिये सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया है।

इस पुस्तक में प्राचीन गाथाओं और रहस्यमय किंवदंतियों को शामिल किया गया है। इस पुस्तक में चार कालातीत लोक कथाओं को शामिल किया गया है। इसमें सोरठी-बृजभार, भरथरी-पिंगला, हीर-रांझा और सारंगा-सदाबृज हैं। इस पुस्तक में बताया गया था कि ग्यारहवीं शताब्दी के सुप्रसिद्ध रहस्यवादी योगी गोरखनाथ, जिनके समावेशी धार्मिक दर्शन ने भारत में सूफी और भक्ति आंदोलनों को गहराई से प्रभावित किया था। उनके जीवन और शिक्षाओं पर आधारित ये कथाएं कभी गोरखनाथ संप्रदाय के घुमक्कड़ योगियों द्वारा सारंगी के उदास स्वरों के साथ गाई जाती थीं। मूल रूप से मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित और काल्पनिक तत्वों-जिन्न, परियों, भूतिया आकृतियों और दिव्य ऋषियों की समृद्ध ये गाथाएं लंबे समय से मेलों, शादियों और आध्यात्मिक समारोहों में क्षेत्रीय प्रदर्शन परंपराओं का केंद्र रही हैं।

किताब के लेखक व वरिष्ठ पत्रकार नलिन वर्मा ने इस संदर्भ में बताया कि इस पुस्तक के जरिये यह बताने का प्रयास किया है कि गोरखनाथ संप्रदाय हिंदू-मुस्लिम की सह संस्कृति और समावेशी समाज की साझी विरासत का विचार है। इसको और मजबूत करने की जरूरत है। गोरखनाथ संप्रदाय की परंपरा से सूफी ,कबीर और भक्ति की दूसरी परंपराओं का जन्म हुआ। नलिन वर्मा ने बताया कि राजद नेता लालू प्रसाद खुद भी सोरठी वृजभार के कई गीतों को भी गाया करते हैं। उन्होंने इस पुस्तक में अपने लोक गायन के अनुभवों को बहुत अच्छी तरह साझा किया है। नलिन वर्मा ने लालू प्रसाद के साथ इससे पहले ”गोपालगंज टू रायसीना ” भी लिखी है।
यह रिपोर्ट मूलतः प्रभात खबर दैनिक में प्रकाशित हुई थी





