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“संज्ञानात्मक ज्ञान की वापसी” – मनीन्द्र नाथ ठाकुर का व्याख्यान – Day 06 (Part 02)

  • July 27, 2025
  • 1 min read
“संज्ञानात्मक ज्ञान की वापसी” – मनीन्द्र नाथ ठाकुर का व्याख्यान – Day 06 (Part 02)

यह कार्यशाला शिक्षा के पुनराविष्कार की एक गंभीर कोशिश है, जो आनंद, न्याय, श्रम और लोकतंत्र जैसे मूल्यों को शिक्षा के केंद्र में लाने की दिशा में पहल करती है। इस अनोखी कार्यशाला को मीडिया प्लेटफॉर्म The AIDEM कवर कर रहा है और 20 जुलाई 2025 तक होने वाले सभी व्याख्यानों की रिपोर्ट और अंतर्दृष्टियाँ साझा करता रहेगा।

स्थान: क कला दीर्घा, वाराणसी। आयोजक: साखी शोधशाला। संयोजक: प्रो. सदानंद शाही एवं मृदुला सिन्हा। उद्घाटन तिथि: 15 जुलाई 2025।


छठा दिन : “संज्ञानात्मक ज्ञान की वापसी” — मनीन्द्र नाथ ठाकुर का व्याख्यान (20 जुलाई 2025)

डॉ. मनीन्द्र नाथ ठाकुर, (सह-प्राध्यापक, राजनीतिक अध्ययन केंद्र, जेएनयू) ने “संज्ञानात्मक ज्ञान की वापसी: 21वीं सदी में गांधी जी के साथ शिक्षा की नई सोच” विषय पर व्याख्यान दिया।

मनीन्द्र नाथ ठाकुर ने अपने व्याख्यान में शिक्षा के भीतर गहराते “संज्ञानात्मक संकट” पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में विश्लेषण और वैचारिक स्वतंत्रता कम होती जा रही है। नॉलेज अब कमोडिटी बन चुका है और शिक्षा का उद्देश्य केवल प्लेसमेंट तक सीमित होता जा रहा है। उन्होंने गांधी, बुद्ध, दादाभाई नौरोजी और प्रेमचंद जैसे विचारकों को उद्धृत करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ‘प्रज्ञा’ और ‘मुक्ति’ होना चाहिए, न कि केवल आर्थिक सफलता।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे पूंजीवाद ने माइंड और बॉडी को अलग कर दिया है और अब टेक्नोलॉजी इस फांक को और बढ़ा रही है। विश्वविद्यालय अब नॉलेज प्रोडक्शन की जगह, पूंजी की ज़रूरत अनुसार ज्ञान गढ़ने वाले संस्थान बनते जा रहे हैं। उन्होंने चेताया कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो शिक्षा से जीवन का संबंध समाप्त हो जाएगा।

 

 महत्त्वपूर्ण बिंदु:

  • गांधी की ‘जीवनशाला’ की संकल्पना को प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन जीने की कला सिखाने वाली होनी चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की संज्ञानात्मक चेतना किस दिशा में जा रही है, इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • उन्होंने चेताया कि ज्ञान का बाजारीकरण अगर ऐसे ही चलता रहा तो सामाजिक चेतना और स्वतंत्र चिंतन समाप्त हो जाएगा।

 

यह कार्यशाला शिक्षा के पुनराविष्कार की एक गंभीर कोशिश है, जो आनंद, न्याय, श्रम और लोकतंत्र जैसे मूल्यों को शिक्षा के केंद्र में लाने की दिशा में पहल करती है।

इस अनोखी कार्यशाला को मीडिया प्लेटफॉर्म The AIDEM ने कवर किया और इसके सभी व्याख्यानों की रिपोर्ट और अंतर्दृष्टियाँ अपने पाठकों तक पहुँचाई।


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